आधी रात की हवा और तुम्हारा ख़याल

 आधी रात की हवा और तुम्हारा ख़याल

आधी रात की हवा

जब चलती है,

तो तुम्हारा ख़याल

बिना इजाज़त

दिल में उतर आता है।

न आवाज़ देता है,

न सवाल करता है—

बस

थोड़ी देर

सुकून बनकर

ठहर जाता है।


मुकेश,, 

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