मोहब्बत के बाद जो खालीपन बचता है

 मोहब्बत के बाद जो खालीपन बचता है


मोहब्बत के बाद

जो खालीपन बचता है,

वो किसी कमरे की तरह है

जिसमें सभी लाइटें जल चुकी हैं,

मगर खिड़कियाँ बंद हैं।


उसमें न कोई गंध है,

न कोई आवाज़,

सिर्फ़ एक गूंज है—

जो तुम्हारी यादों के साये में

धीरे-धीरे बढ़ती है।


वह खालीपन

कभी चीखता नहीं,

कभी रोता नहीं,

बस रहता है,

साँसों में, ख्यालों में,

और उन छोटे-छोटे लम्हों में

जहाँ तुम और मैं कभी साथ थे।


और हम सीखते हैं,

कि मोहब्बत खोने के बाद भी

खालीपन अपना घर बना लेता है,

और हम उसे हमेशा अपने अंदर ले चलते हैं।


मुकेश ,,,,,,,,

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