काश ! चाय की प्याली में

काश !
चाय की प्याली में घोल के पी जाता,
तुम्हारी हँसी और हो जाता ताज़ा दम !
मुकेश इलाहाबादी ------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :