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हमारे पास सिर्फ एक ही रास्ता था,

हमारे पास सिर्फ एक ही रास्ता था, शहर छोड़ना या तुझे भूल जाना था सफर में तनहा खुश था, पूछा चूँकि साथ साथ चलोगे तुम्ही ने कहा था राह के पत्थरों से पेड़ों से पूछ लेना बहुत देर तक तुम्हारी राह तका था मुहब्बत की राह में दर दर पे रोड़े हैं कभी, ईश्क़ की किताब  में  पढ़ा था दरिया ऐ ग़म बहता है मेरे सीने में मत पूछ मै कब तक बहता रहा था  गर कभी याद करोगे तो कहोगे कि कुछ भी हो, मुकेश इक दीवाना था मुकेश इलाहाबादी ------------------

हमारे पास सिर्फ एक ही रास्ता था,

हमारे पास सिर्फ एक ही रास्ता था, शहर छोड़ना या तुझे भूल जाना था सफर में तनहा खुश था, पूछा चूँकि साथ साथ चलोगे तुम्ही ने कहा था राह के पत्थरों से पेड़ों से पूछ लेना बहुत देर तक तुम्हारी राह तका था मुहब्बत की राह में दर दर पे रोड़े हैं कभी, ईश्क़ की किताब  में  पढ़ा था गर कभी याद करोगे तो कहोगे कि कुछ भी हो, मुकेश इक दीवाना था मुकेश इलाहाबादी ------------------

याद आये है तेरा फूलों सा महकता

याद आये है तेरा फूलों सा महकना स्याह  रातों में चाँदनी सा चमकना हाथ थामे थामे चले जाना दूर तक तेरा रह-२,भरी गागर सा छलकना माथे पे बल  खाती वो बाँकी ज़ुल्फ़ें जिन्हे अदा से संवारना फिर हँसना कभी खिलखिलाना कभी रूठ जाना कभी कभी तेरा खुद,मुझसे लिपटना समंदर किनारे दूर तक दौड़ते जाना फिर वो तेरा मेरे इंतज़ार में  ठहरना मुकेश इलाहाबादी ---------------

दिल के तम्बूरे में सिर्फ तेरा ही राग बजता है

दिल के तम्बूरे में सिर्फ तेरा ही राग बजता है वरना तो ये तम्बूरा हरदम गुप् - चुप रहता है दुनिया  के झमेले से जो कभी फुर्सत मिले तो मुक्कु अपनी धड़कनो को सुन्ना क्या कहता है मुकेश इलाहाबादी --------------------------

यंहा अँधेरा ही अँधेरा होता है

यंहा अँधेरा ही अँधेरा होता है तेरे आने से  उजाला होता है ग़र रातों में बेनक़ाब निकले, महताब  का  अंदेसा होता है तू आ जाये  तो सावन भादों वर्ना बारों मास सूखा होता है ये  बड़ी  मतलबी  दुनिया है यंहा कौन किसी का होता है मुकेश इलाहाबादी ----------

हज़ारों इम्तहाँ ले चुका ज़माना

हज़ारों इम्तहाँ ले चुका ज़माना हमें किसी भी क़ाबिल न माना सैलाब बन के क़हर ढाऊंगा, ग़र छलक गया मेरे सब्र का पैमाना मुकेश इलाहाबादी ---------------

तुम मुझे सुनोगे ज़रूर

मुझे मालूम है तुम मुझे सुनोगे ज़रूर मगर तब ! जब मेरे लफ्ज़ खामोश हो जाएंगे मुकेश इलाहाबादी ----------------------------

तेरे बारे में सोचते सोचते

तेरे बारे में सोचते सोचते फिर सो जाऊँगा रोते रोते उठता नहीं  बोझ फिर भी  चलूँगा तेरी यादें ढोते ढोते मुकेश इलाहाबादी -------
बाद उसके मर भी जाऊँ ग़म ना  है तुझको पास से देखूँ यही तमन्ना है तू दूर है मुझसे नाराज़ भी, ग़म नहीं इस बात की तसल्ली है तू अपना है मुकेश इलाहाबादी --------------------

घरवाली का पारा हाई है

घरवाली का पारा हाई है कामवाली नहीं आयी है कभी बच्चे कभी बर्तन सब की शामत आई है रूखा - सूखा जो  मिले खा लेने में ही भलाई है  पड़ोसन को देखा लिया  तब से पत्नी भिन्नाई है सच तो यही पत्नी मिर्ची पड़ोसन ताज़ी मिठाई है मुकेश इलाहाबादी ----