गूंगो को ज़ुबान दिया जाए

गूंगो को ज़ुबान दिया जाए
शेरों को लगाम दिया जाए
अधूरे रह गए है जो ख्वाब
उन्हें भी मुकाम दिया जाए
कफ़स में जो रह रहे हैं उन्हें
हवाके लिए बाम दिया जाए
रिन्द कोई भी प्यासा न रहे
सभी को जाम दिया जाए
फुटपाथ पे न सोयेगा कोई
सब को मकान दिया जाए
सच और प्रेम का राज़ होगा
शहर में एलान किया जाए
मुकेश इलाहाबादी -------

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