तुम्हे क्या मालूम ?

तुम्हे  क्या मालूम ?

रिश्तों
के सूखे पत्तों
के अलाव से
काट रहा हूँ
ज़िंदगी की शेष
सर्द रातें

मुकेश इलाहाबादी ----

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :