फर्क --

फर्क --

मेरी 
किताब में सिर्फ 'तुम' हो 
और , तुम्हारी किताब में ?
'मै ' कंही भी नहीं 


मुकेश इलाहाबादी -------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :