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तन धरा शिवाला मे
तन धरा शिवाला मे
मन रखा मधुशाला मे
भूखे की है सारी ज़न्नत
इक टुकडा निवाला मे
बीत गया दिन बैठे बैठे,
यूँ ही हीला - हवाला मे
कितने ही बर्बाद हुए इस
हाला और मधुबाला मे
मैंने तो है सर्दी काटी
केवल एक दुशाला मे
मुकेश इलाहाबादी ---------
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