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Monday, 8 July 2013

ज़िदगी से शिकायत भी नही

 

ज़िदगी से शिकायत भी नही
चेहरे पे मुसकुराहट भी नही

हमारे घर अंधेरा न पाओगे
लेकिन जगमगाहट  भी नही


ऐसा भी नही हम बेखाफ हैं
पै चेहरे पे घबराहट भी नही

चौराहे पे लाश  पडी है कबसे
बस्ती मे सुगबुगाहट भी नही

सूरज कब का विदा हो गया
चॉद उगने की आहट भी नही

मुकेश  इलाहाबादी ...........

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