“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बहुत सारे सुखों के बीच
तुम्हारा साथ न होना
(सब से बड़ा दुःख है )
बहुत सारे दुःखों के बीच
तुम्हारी यादें मेरे लिए
(सब से बड़ा सुख है )
मुकेश इलाहाबादी ------
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