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Wednesday, 20 January 2016

नींद घिर आयी आँखों मे

नींद घिर आयी आँखों मे
खाब हुए स्याही आँखों मे
न ढूंढो हीरे मोती, ढूंढ लो 
खारा पानी मेरी आँखों में
पारा  हुआ  काजल हूँ  मै
लगा लो अपनी आँखों में  
घुल जाऊँ नमक बन, जो
सागर है तुम्हारी आखों में
डूब जाने दो मुझको, तुम
इन छलछलाती आँखों में  

मुकेश इलाहाबादी -------

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