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Friday, 22 September 2017

नहीं खौलता है खून किसी भी बात पे

चूल्हे
पे चढ़ी हांडी भी
आँच पा के खौलने लगती है
और छलक पड़ती है
अगर जल्दी ही न उतारी गयी आग से

हिमालय की बर्फ भी
पिघल जाती है सूरज के ताप से
और फिर नदी से भाप बन उड़ जाती है
और बादल बन बरसती है उमस और गर्मी के खिलाफ

शायद हम हिमालय के ग्लेशियर से भी ज़्यादा
ठन्डे हो चुके हैं ,
नहीं खौलता है खून किसी भी बात पे

मुकेश इलाहाबादी --------------------------

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