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एक दिन -------------
एक दिन
हथेलियों पे
उग आये
कुछ
बर्फ के गोले
सोखने लगे
धीरे धीरे
मेरा गुनगुनापन
और अब मै
गल कर बह चूका हूँ
दूर तक
जंहा तक
ये सूखी रेखाएं देखते हो
इस जमी पे
मुकेश इलाहाबादी
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