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जाने किस बदहवासी में
बैठे ठाले की तरंग ----------------------
जाने किस बदहवासी में जिए जाता हूँ
सुबो ऑ शाम बेहिसाब पिए जाता हूँ
जानता हूँ तू न आयेगी मुझसे मिलने
फिर क्यूँ तेरा इंतज़ार किये जाता हूँ
मुकेश इलाहाबादी ------------------------
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