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साहिल के रेत की हर शिकन बताती है
बैठे ठाले की तरंग ----------------------
साहिल के रेत की हर शिकन बताती है
हर शिकन की अपनी अलग कहानी है
ये उजड़ी हुई हुई बस्ती, ये टूटे हुए मकां
शहर किस कदर लुटा इसकी निशानी है
मुकेश इलाहाबादी ----------------------
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