कभी अपनी महकती साँसों को पढ़ लिया होता








कभी  अपनी  महकती  साँसों  को  पढ़ लिया होता
कोई चुपके से हवाओं में 'मुहब्बत' लिख गया होगा










मुकेश इलाहाबादी -----------------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

हरिवंश पुराण - तृतीय खंड — भाग 26 - द्वारका का विस्तार

हरिवंश पुराण - भाग ३० — बाणासुर :