होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक
ज़माने ने जुबां को सिला न होता,
ज़माने ने जुबां को सिला न होता,
हमने भी आखों की जगह,
जुबां से काम लिया होता.
वो तो कुछ ज़ख्म थे,
मेरी उरियानियों में छुप ना पाए
वरना हमने तो,
मुहब्बत को छुपा लिया होता
No comments:
Post a Comment