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हम तो बस उसकी मासूमियत के कद्रदान थे
हम तो बस उसकी मासूमियत के कद्रदान थे
पर वो हमसे कुछ और सोच के खफा हुआ होगा
जानता हूँ ,रात भर वो शख्श भी न सोया होगा
कल जब हमने उससे अलविदा कहा होगा,
मुकेश इलाहाबादी --------------------------
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