आ तेरे हंसी चेहरे पे लबे जाम रख दूं ,






आ तेरे हंसी चेहरे पे लबे जाम रख दूं ,
वस्ल की रात में हिज्र क्या याद रक्खूं
 मुकेश इलाहाबादी -----------------------

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