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बूँद बूँद अपना आँचल भरता है बादल
बूँद बूँद अपना आँचल भरता है बादल
फिर दिल खोल के बरस जाता है बादल
मेरी आखों के फलक में भी है एक बादल
कितने समंदर लिए फिरता है ये बादल
ज़मी की तरह जब भी कोई बिछ जाए है
रिमझिम रिमझिम बरस जाता है बादल
मुकेश ईलाहाबादी ------------------------
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