जाम ऐ मुहब्बत तो सब से छुपा बैठे


गुस्ताखी माफ़ !
जाम ऐ मुहब्बत तो सब से छुपा बैठे
शब् भर की खुमारी कंहा ले के जांए ?
मुकेश इलाहाबादी ------------------------

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