जी चाहे तो पी लेते हैं रोज़ ब रोज हम,,,


जी चाहे तो पी लेते हैं रोज़ ब रोज हम,,,
वैसे ये बात हमारी आदत मे शुमार नही
मुकेश इलाहाबादी -----------------------

Comments

Popular posts from this blog

एक मुसाफिर की डायरी से --------------

एकांत एक नदी है

बात दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है