बारिस की शाम पुरनम हवा मे फुरसत से बैठे हैं वो




 बारिस की शाम पुरनम हवा मे फुरसत से बैठे हैं वो
चाय की चुस्कियों संग रह रह के याद आता है कोई
मुकेश इलाहाबादी ----------------------------------------

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