सूख गये सब जेठ मॉह मे,तरु पल्लव अरु संसार

सूख गये सब जेठ मॉह मे,तरु पल्लव अरु संसार
हर्षित धरती भये मगन ब्रक्ष, मेघा बरसे धारमधार 
मुकेष इलाहाबादी ........................

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