सोचता हूँ



सोचता हूँ

बन के तराना
तेरे होठों पे गुनगुनाऊँ

बन के सितारा
तेरे आँचल से लिपट जाऊंं
कि ,
ऐ कँवल
तेरे शाख पे
भँवरे सा बैठ जाऊं

वैसे,
अब तो
दिल ने भी
कर दी बग़ावत
अपने सीने से निकल
तेरी धड़कनों में बस जाऊं

मुकेश इलाहाबादी -------

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