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Tuesday, 3 June 2014

मन बहकने लगा है

मन बहकने लगा है
तन दहकने लगा है

तेरा नाम सुन कर,
दिल धड़कने लगा है

बेखुदी ऐसी मोगरा
हमें महकने लगा है

तेरी मासूम हंसी से
चाँद जलने लगा है

उदास था दिल मेरा
फिर उमगने लगा है

मुकेश इलाहाबादी ---

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