हमने तो फ़क़त चंद लम्हे मांगे थे ज़िंदगी के

हमने तो फ़क़त चंद लम्हे मांगे थे ज़िंदगी के
ज़ालिम ने कातिलाना हंसी उछाल दी मेरी तरफ

मुकेश इलाहाबादी -------------------------------------

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