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Wednesday, 9 March 2016

ग़र, तू कहे तो कुछ देर सो लूँ

ग़र, तू कहे तो कुछ देर सो लूँ
तेरे काँधे पे सर रख कर रो लूँ
लगे हैं तमाम दाग़  दामन में
पश्चाताप के आंसुओं से धो लूँ
जब आ ही गया  हूँ तेरे  शहर
क्यूँ न कुछ देर तेरे घर हो लूँ 

मुकेश इलाहबदी -------------

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