होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Monday, 5 September 2016

अंधेरी , रातों में

अंधेरी ,
रातों में
तुम्हरे नाक की
लौंग चमकती है
किसी ध्रुव तारे सा
और मैं काट देता हूँ
तमाम सर्द रातें

मुकेश इलाहाबादी -----

No comments:

Post a Comment