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Friday, 9 September 2016

सच की राह में रोडे बहुत हैं

सच की राह में रोडे बहुत हैं
अच्छे  इन्सान  थोडे बहुत हैं

रेस का मैदान बन गया शहर
यहां आदमी कम घोडे बहुत हैं

फूल मुहब्बत के खिलाये कम
राकेट मिसाइल छोडे बहुत हैं

मुकेश इलाहाबादी ..............

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