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Monday, 19 December 2016

इक बार चाँद छूने की तमन्ना है

इक बार चाँद छूने की तमन्ना है
इक बार तुझे पाने की तमन्ना है

अपने उजड़े हुए गुलशन को,तेरी  
सोहबत से सजाने की तमन्ना है

इक गुनाह करने के तमन्ना है
तेरा दिल चुराने की तमन्ना है

तू इक किनारा मैं वो किनारा
इक पुल बनाने की तमन्ना है

मैं खामोश हो जाऊँ इसके पहले
तुजे ग़ज़ल सुनाने की तमन्ना है

मुकेश इलाहाबादी -------------