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Wednesday, 8 February 2017

एक लघु कथा


एक लघु कथा
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इक
अदृश्य पुल के नीचे
इक खामोश दरिया बहता रहा
बहुत दिनों तक
आखिर
एक दिन,
नदी सूख गयी
पुल भी टूट गया

सुना है ! अब वहां रेत् ही रेत् है

मुकेश इलाहाबादी -------

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