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Friday, 21 July 2017

तुम्हारे पास तमाम रस्ते थे



ये
और बात
तुम्हारे पास तमाम रस्ते थे
मगर
तुमसे  मिलने के बाद
मेरे पास, और कोई विकल्प न था
सिवाय तुमको चाहते रहने के

मुकेश इलाहाबादी ---------------