Pages

Sunday, 9 July 2017

अंजुरी के कटोरे में

सोचता
हूँ, अपनी अंजुरी के कटोरे में
तुम्हारी दूधिया हंसी समेट लूँ
और,
उसमे तुम्हारे होंठों का गुलाबीपन मिला कर
उछाल दूँ आसमान में
फिर दुनिया को गुलाबी गुलाबी देखूं

मुकेश इलाहाबादी --------------------