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Thursday, 4 January 2018

आधी सदी चलते रहे

आधी सदी चलते रहे
यूँ ही तनहा बढ़ते रहे
वो और लोग रहे होंगे
कारवाँ में चलते रहे
धुंध तीरगी आँधियाँ
मुश्किलों में बढ़ते रहे
सोचता हूँ तो लगता है
ज्यूँ ख्वाब में चलते रहे
मुहब्बत आग का दरिया
मुकेश डूब कर बढ़ते रहे
मुकेश इलाहाबादी ----

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