तेरी तस्वीर देखता हूँ कुछ सपने बुनता हूँ

तेरी तस्वीर देखता हूँ कुछ सपने बुनता हूँ
तनहा रातों में तेरी यादों के मोती चुनता हूँ

लोग पूछते हैं इतना खामोश क्यूँ रहता हूँ
उन्हें क्या पता दिल के अंदर तुझको सुनता हूँ

मुकेश इलाहाबादी ---------------------------

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