मै चींखना चाहता हूँ

मै
चींखना चाहता हूँ
चींख नहीं पाता
सिर्फ गों - गों कर के रह जाता हूँ
रोना चाहता हूँ - रो नहीं पाता
हँसना चाहता हूँ तो
हँसी की नदी न जाने किस रेगिस्तान में
जा के सूख जाती है ?
लेकिन
टी वी के रिमोट का बटन दबाते ही
मुझे हँसी आने लगती है
रोना भी आने लगता है
किसी गलत बात पे गुस्सा भी आने लगता है
यंहा तक कि मुट्ठियां भी भींच जाती हैं
और छोटी छोटी दुःख भरी घटनाओं पर
घंटो के लिए उदास हो जाता हूँ

(कंही टी वी के रोमोट का एक बटन मेरे
दिमाग़ में तो नहीं फिट हो गया है ?

मुकेश इलाहाबादी --------------------------

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