रेत् की नदी मिली मुझको

रेत् की नदी मिली मुझको
ऐसी ज़िंदगी मिली मुझको

कहने को बहुत लोग मिले
सिर्फ तू नहीं मिली मुझको

तेरे संग साथ का सुख न था
वर्ना हर खुशी मिली मुझको

मुकेश इलाहाबादी ---------

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