लड़कियाँ मोहब्बत यूँ भी करती हैं…
लड़कियाँ
मोहब्बत करती हैं
जैसे कोई दीया धीमी हवा में जलता हो —
न टिक कर, न बुझ कर,
बस रोशनी दे कर।
वे तुम्हारे नाम को
कभी ज़ोर से नहीं बोलतीं,
मगर जब भी कोई पूछता है "ख्वाहिश क्या है?"
तो सबसे पहले तुम्हारा चेहरा
ज़हन में आता है।
वे तुम्हारी पसंद की चाय बनाना सीख लेती हैं,
भले ही खुद को कॉफ़ी की आदत हो,
और कप पर तुम्हारा होंठों का निशान
उन्हें तावीज़ जैसा लगता है।
लड़कियाँ
मोहब्बत में
खुद से कम सवाल करती हैं,
और तुम्हारे हर जवाब को
तसल्ली बना लेती हैं।
तुम्हारे एक "ठीक हूँ" में
वो पूरी रात जाग जाती हैं,
सोचती हैं
"क्या सच में ठीक है, या फिर कह नहीं पाया?"
वो तुम्हारे घर का रास्ता नहीं पूछतीं,
मगर हर मोड़ याद रखती हैं
जहाँ से तुमने कभी उन्हें बताया था
"यहाँ से सीधा जाता हूँ मैं रोज़।"
लड़कियाँ
मोहब्बत में
कभी अपनी तस्वीर नहीं भेजतीं,
मगर तुम्हारी भेजी एक मुस्कुराहट
सालों तक अपने फोन की गैलरी में संभालती हैं।
उनके पास
"आई लव यू" कहने के हज़ार मौके होते हैं,
मगर वे अक्सर कहती हैं —
"खाना खाया?"
"थक गए होगे न?"
"अपना ख्याल रखना..."
और इन लफ़्ज़ों में
वो हर बार अपना दिल रख देती हैं।
लड़कियाँ
जब मोहब्बत करती हैं,
तो किसी समुंदर की तरह नहीं बहतीं
बल्कि
किसी कुएँ की तरह गहरी हो जाती हैं,
जहाँ हर आवाज़ गूंजती है
मगर बाहर नहीं आती।
और मैं…
मैं अब भी उस लड़की को याद करता हूँ,
जो मेरे हर ‘अलविदा’ में
'फिर मिलेंगे' ढूंढ लिया करती थी।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment