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Thursday, 26 February 2026

तुलसी के पत्तों में प्रार्थना

 तुलसी के पत्तों में प्रार्थना


आँगन के एक कोने में

तुलसी चुपचाप खड़ी है 

जैसे घर की धड़कन

मिट्टी में रोपी गई हो।


उसके पत्तों पर

सुबह की ओस ठहरती है,

मानो रात भर की चिंताएँ

धीरे से धुल गई हों।


हर संध्या दीये की लौ

जब उसे छूती है,

हवा में घुल जाती है

एक धीमी-सी प्रार्थना 

जिसमें शब्द कम,

विश्वास अधिक होता है।


तुलसी के पत्तों में

घर का सुकून बसता है,

माँ की आवाज़,

पिता की चुप चिंता,

और बच्चों की अधूरी हँसी।


वह कहती नहीं कुछ भी 

बस महकती है,

जैसे आस्था

अब भी जीवित है

इस थके हुए समय में।


मुकेश ,,,,,,

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