“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मैं तुम्हारी आँखों के
इंद्रधनुष में नहीं हूँ,
ये बात
मैं जानता हूँ।
फिर भी
हर बारिश के बाद
मैं तुम्हारी आँखों में
झाँक लेता हूँ—
शायद इस उम्मीद में
कि किसी रंग की ओट में
मेरा नाम
थोड़ी देर
ठहर गया हो।
मुकेश,,,
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