मैं, खामोशी और बरसात
मैं खड़ा हूँ उस सड़क पर,
जहाँ बारिश की बूंदें मेरे चेहरे से बातें करती हैं।
खामोशी मेरे साथ चलती है,
जैसे कोई पुराना दोस्त,
जो बिना शब्दों के सब समझ ले।
बारिश की हर बूँद में
तेरी याद की खुशबू है,
हर गीली मिट्टी में
तेरे कदमों का असर है।
मैं सुनता हूँ उसका संगीत,
और खुद को खो देता हूँ
उस पानी में,
जहाँ सिर्फ हम और हमारी यादें हैं।
खामोशी बोलती है
वो बातें, जो हम कभी नहीं कह सके।
हर बूँद उसके शब्द बन जाती है,
और मेरे दिल में
एक पुराना गीत बज उठता है,
जिसे मैं हमेशा से ढूँढ रहा था।
मैं भीगता हूँ,
पर दर्द नहीं,
सिर्फ एक मधुर एहसास है,
जो मुझे तेरे पास ले जाता है।
बारिश और खामोशी
मेरे अंदर एक पुल बना देती हैं,
जो हमारी अधूरी कहानियों को जोड़ता है,
और मुझे तेरे करीब लाता है।
और जब ये बारिश थम जाती है,
मैं खड़ा रह जाता हूँ,
गीला, पर ताजगी से भरा।
खामोशी अब भी मेरे साथ है,
लेकिन अब मैं जानता हूँ
बारिश ने मुझे सिखाया है
तेरे बिना भी जीना,
पर तेरी यादों के साथ।
मुकेश ,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment