“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
आधी रात की हवा और तुम्हारा ख़याल
आधी रात की हवा
जब चलती है,
तो तुम्हारा ख़याल
बिना इजाज़त
दिल में उतर आता है।
न आवाज़ देता है,
न सवाल करता है—
बस
थोड़ी देर
सुकून बनकर
ठहर जाता है।
मुकेश,,
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