मैं, दिल के कागज़ और कलम
मैं बैठा हूँ,
दिल के कागज़ को खोले हुए,
और कलम मेरे हाथ में
जैसे कोई साथी,
जो मेरी हर धड़कन को शब्दों में बदल दे।
हर शब्द तेरे नाम का गीत है,
हर लकीर तेरी याद की परछाई।
मैं लिखता हूँ अधूरी बातें,
जिन्हें हमने कभी कह नहीं पाया,
और हर शब्द में तेरी मुस्कान झलकती है।
कभी ये कागज़ मेरे आँसुओं से भीग जाता है,
कभी कलम रुक जाती है,
लेकिन मैं थकता नहीं।
क्योंकि हर चोट, हर ख्वाब, हर खामोशी
मुझे तेरे करीब लाती है,
और मेरे शब्दों को रूहानी बना देती है।
मैं, दिल के कागज़ और कलम
तीनों मिलकर मेरी तन्हाई में
एक संगीत रचते हैं,
जहाँ अधूरी बातें भी
एक खूबसूरत, रूहानी कविता बन जाती हैं।
और जब मैं थककर पलटता हूँ,
देखता हूँ कागज़ पर
तेरे और मेरे ख्वाबों की कहानी,
तो मुस्कुराता हूँ
क्योंकि हर शब्द, हर पन्ना, हर लकीर
मुझे यह सिखाती है:
प्यार सिर्फ महसूस करने का नहीं,
लिखने और जीने का भी नाम है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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