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Sunday, 1 March 2026

रात की सीढ़ियों पर रख देता हूँ तुम्हारा नाम,

रात की सीढ़ियों पर रख देता हूँ तुम्हारा नाम,

चाँद की पेशानी पर लिख देता हूँ पैग़ाम,

नींद मेरी हो न हो कोई बात नहीं,


तुम मेरी ख़्वाबों में आबाद रहना हर शाम।


मुकेश ,,,,,,,,,

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