प्रेम नहीं लौटता (दो)
वह
धूप की तरह आता है,
छूकर चला जाता है
और फिर
स्मृति की दीवारों पर
एक हल्की गरमाहट छोड़ जाता है।
तुम सोचते हो
वह फिर से आएगा
उसी राह, उसी आवाज़ में,
पर प्रेम
कभी दोहराया नहीं जाता।
वह बस
एक बार घटित होता है,
और फिर
हम उम्र भर
उसके होने की रोशनी में
थोड़ा-थोड़ा जीते रहते हैं।
मुकेश ,,,,
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