डिठौना : एक छोटी-सी काली रक्षा-रेखा
किसी माँ की उँगली पर
थोड़ा-सा काजल होता है,
और वह
बच्चे के गाल के कोने पर
एक छोटा-सा
काला बिंदु बना देती है।
उसे कहते हैं
डिठौना।
कितना छोटा-सा शब्द,
और उसके भीतर
कितनी सदियों की
ममता छिपी हुई है।
ये सिर्फ़ काजल नहीं,
यह लोक-स्मृति का
एक प्राचीन चिन्ह है
जहाँ विज्ञान से पहले
विश्वास जन्म लेता था।
जब माँओं ने देखा
कि दुनिया की नज़र
कभी-कभी
फूलों को भी मुरझा देती है,
तो उन्होंने
काजल की एक बूँद से
बच्चे के चारों ओर
एक अदृश्य घेरा बना दिया।
किसी ग्रंथ में
इसका कोई सूत्र नहीं,
पर हर गाँव
हर आँगन
हर भाषा में
यह परंपरा
चुपचाप जीवित रही।
एक छोटा-सा बिंदु
जो कहता है
कि सुंदरता को
थोड़ा-सा अपूर्ण बना दो,
ताकि
ईर्ष्या की नज़र
उस पर टिक न सके।
डिठौना
दरअसल
माँ की वह प्रार्थना है
जो शब्दों में नहीं
काजल में लिखी जाती है।
वह
बच्चे के गाल पर
एक बिंदु बनाकर
मानो ब्रह्मांड से कहती है
“इस छोटे-से जीवन को
मेरी नज़र से देखना,
दुनिया की नज़र से नहीं।”
और इस तरह
एक काले से बिंदु में
छिपा रहता है
मानव सभ्यता का
सबसे कोमल शोध
कि प्रेम
सिर्फ़ पालता नहीं,
वह
बचाने के लिए
अपने छोटे-छोटे
जादू भी रचता है।
मुकेश ,,,,,,,,
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