“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
सिगरेट की खाली डिब्बी
सड़क किनारे
पड़ी है
सिगरेट की एक खाली डिब्बी—
कभी
किसी की उँगलियों में
जलती रही होगी
एक-एक करके कई शामें।
अब
बस हल्की सी गंध है
और थोड़ी सी ख़ामोशी,
जैसे
किसी छोटी-सी आदत की
पूरी कहानी
यहीं खत्म हो गई हो।
मुकेश्,,,,
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