“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बारिश में भीगता हुआ पोस्टर
दीवार पर
चिपका हुआ
एक पोस्टर—
बारिश में
धीरे-धीरे
भीग रहा है।
रंग बह रहे हैं,
शब्द धुंधले हो रहे हैं,
और काग़ज़
कोनों से मुड़ने लगा है।
कल तक
जो किसी का
एलान था,
आज
पानी में घुलती
एक चुप कहानी है।
मुकेश्,,,
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