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Wednesday, 11 March 2026

जब अतीत अचानक बोल उठता है

 जब अतीत अचानक बोल उठता है


कभी-कभी

अतीत

बिना किसी आहट के

अचानक बोल उठता है।


न कोई तारीख़ याद आती है,

न कोई पूरा दृश्य

बस एक हल्की-सी खुशबू,

एक पुराना गीत,

या किसी रास्ते का

अनजाना मोड़।


और अचानक

समय की परतें हटने लगती हैं,

जैसे किसी बंद संदूक का

ढक्कन धीरे-धीरे खुल गया हो।


उसके भीतर

कुछ अधूरे वाक्य मिलते हैं,

कुछ भूली हुई हँसी,

और कुछ ऐसे पल

जिन्हें हमने

कभी ठीक से जिया ही नहीं था।


अतीत

कभी वापस नहीं आता,

पर उसकी आवाज़

कभी पूरी तरह जाती भी नहीं।


वह बस

किसी शांत क्षण का इंतज़ार करती है,

और फिर

धीरे से याद दिला देती है


कि समय भले आगे बढ़ गया हो,

पर जीवन के कुछ लम्हे

हमारे भीतर

अब भी वैसे ही

साँस ले रहे हैं।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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